Muhuratam

मुहूर्तम्

गुरु पूर्णिमा: गुरु, ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा के प्रति कृतज्ञता का पावन दिन

आषाढ़ पूर्णिमा पर गुरु, आचार्य और जीवन-पथ प्रदर्शकों का सम्मान करने का शुभ अवसर

तारीख

2026-07-29

मुहूर्त समय

गुरु पूर्णिमा चंद्रोदय मुहूर्त

शुरुआत समय: 6:41 PM

आपके शहर में आषाढ़ पूर्णिमा के चंद्रोदय-आधारित अनुष्ठान का मुख्य समय।

तिथि समय

पूर्णिमा आरंभ

06:19 PM on Jul 28, 2026

पूर्णिमा समाप्ति

08:05 PM on Jul 29, 2026

गुरु पूर्णिमा क्या है?

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है और गुरु, आचार्य तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को समर्पित है।

इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि महर्षि वेदव्यास ने वैदिक ज्ञान को संकलित और व्यवस्थित किया।

भक्त गुरु पूजन, दक्षिणा, शास्त्र-पाठ और आत्मचिंतन के माध्यम से कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा और धर्म, ज्ञान, तथा आत्मोन्नति में गुरु के महत्व को रेखांकित करती है।

यह पर्व विनम्रता, श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव विकसित करता है।

सांस्कृतिक रूप से यह शिक्षक, माता-पिता और बड़ों के प्रति सम्मान को मजबूत करता है।

रीति-रिवाज और परंपराएं

  • प्रातः स्नान कर गुरु पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।
  • गुरु, शिक्षक, माता-पिता या बड़ों को पुष्प, फल और प्रणाम अर्पित करें।
  • परंपरा अनुसार व्यास पूजा या गुरु पादुका पूजन करें।
  • गुरु स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम या चयनित शास्त्रों का पाठ करें।
  • दक्षिणा, दान और सेवा भावपूर्वक करें।
  • स्वाध्याय, मौन और आत्मचिंतन में समय दें।
  • संध्या प्रार्थना और चंद्रोदय आधारित उपासना के साथ अनुष्ठान पूर्ण करें।

पूजा-विधि (क्रमबद्ध)

पूजा स्थल शुद्ध कर गुरु/व्यास/पादुका का चित्र स्थापित करें।

व्रत का संकल्प लेकर आचमन करें।

गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

गुरु मंत्र, गुरु स्तोत्र या वैदिक मंत्रों का जप करें।

आरती कर श्रद्धा से आशीर्वाद लें।

सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या दान करें।

प्रसाद वितरण कर अनुशासित अध्ययन का संकल्प लें।

पारंपरिक अर्पण

गुरु पूर्णिमा में प्रचलित अर्पण और सेवाएं:

  • गुरु पूजन हेतु पुष्प, चंदन और अक्षत
  • फल, मिष्ठान और सात्विक नैवेद्य
  • दक्षिणा स्वरूप उपयोगी वस्तु या वस्त्र अर्पण
  • कृतज्ञता भाव से दान और सेवा
  • पूजा के समय धूप और घी का दीप
  • परिवार और समुदाय में प्रसाद वितरण